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वामपंथी गठबन्धन: आसान समझ और ताज़ा अपडेट

अगर आप भारतीय राजनीति की खबरें पढ़ते हैं तो "वामपंथी गठबन्धन" शब्द कई बार सामने आया होगा। यह एक ऐसी टीम है जहाँ बाएँ‑पक्षीय (वाम) पार्टियाँ मिलकर चुनाव में ताकत बनाती हैं। ऐसे गठबन्धन का मकसद वोटर बेस को एक साथ लाना और बड़े विपक्षी दलों के खिलाफ तालमेल बनाकर जीत हासिल करना होता है। चलिए, इसको थोड़ा विस्तार से देखते हैं कि ये गठबन्धन कैसे काम करता है और अब तक क्या-क्या हुआ है।

क्या है वामपंथी गठबन्धन?

वामपंधी गठबन्धन का मतलब सिर्फ दो‑तीन पार्टियों को एक साथ लाना नहीं, बल्कि उनके विचारों, एजेंडा और चुनावी रणनीतियों को मिलाकर एक सुसंगत प्लेटफ़ॉर्म बनाना है। आम तौर पर इसमें कम्युनिस्ट पार्टी (एमपी), कांग्रेस के वामपंथी समूह, एवं कुछ क्षेत्रीय दल शामिल होते हैं जो समाजवादी या किसान‑केन्द्रित नीतियाँ पेश करते हैं। इन पार्टियों का मुख्य लक्ष्य सामाजिक न्याय, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन जैसी मुद्दों पर फोकस करना होता है।

गठबन्धन बनाते समय सबसे बड़ी चुनौती मतदाता वर्ग को एक साथ रखना होती है। अक्सर विभिन्न वामपंथी दलों के बीच छोटी‑छोटी विचारधारा की भिन्नताएँ रहती हैं, इसलिए उन्हें समझौता करके एक ही घोषणा पत्र तैयार करना पड़ता है। यह प्रक्रिया कभी‑कभी कठिन हो जाती है, पर जब सफल हो जाती है तो बड़े विपक्षी को चुनौती देना आसान हो जाता है।

वर्तमान में प्रमुख खिलाड़ी और उनका असर

अभी के समय में वामपंथी गठबन्धन में सबसे सक्रिय पार्टियाँ हैं:

  • कांग्रेस (वामीय मोड़): राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर कार्य करती है, युवा और महिला वोटर को अपील करती है।
  • सीपीआई(एम) एवं सीपीआई(ML): वर्ग संघर्ष, मजदूर हक्कों और किसानों की मांगें उनके एजेंडा में प्रमुख हैं।
  • राज्यीय गठजोड़ पार्टियाँ: जैसे तमिलनाडु में डीएमके (वाम), उत्तराखंड में जैन पार्टी आदि, जो स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर लाते हैं।

इनके बीच तालमेल बनाकर कई बार राज्य चुनावों में जीत हासिल हुई है। उदाहरण के तौर पर 2024 के कुछ विधानसभा चुनावों में वामपंथी गठबन्धन ने मिलकर लगभग 30% वोट शेयर बनाया, जिससे कई राज्यों में सरकार बनाने की संभावना बनी।

हाल ही में इस गठबन्धन ने सामाजिक सुरक्षा योजना, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा को मुफ्त करने का संकल्प लिया है। यह घोषणा उन क्षेत्रों में असर डाल रही है जहाँ सरकारी सेवाएँ कम हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लोगों ने इन वादों को सराहा है, इसलिए अगली चुनावी लड़ाई में उनके समर्थन की उम्मीद बढ़ गई है।

भविष्य का अंदाज़ा लगाते हुए कहा जा सकता है कि अगर गठबन्धन अपने अंदरूनी मतभेदों को कम करके एक मजबूत एंट्री-फ़ॉर्म बनाता रहे, तो वह राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुख खिलाड़ी बन सकता है। लेकिन इसके लिए निरंतर संवाद, स्थानीय नेताओं की भागीदारी और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन जरूरी होगा।

तो संक्षेप में, वामपंथी गठबन्धन एक ऐसी टीम है जो सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देती है, विभिन्न बाएँ‑पक्षीय पार्टियों का सहयोग लेकर वोटर बेस बढ़ाने की कोशिश करती है, और अभी के समय में कई राज्य चुनावों में इसका प्रभाव दिख रहा है। आप अगर इस विषय पर आगे पढ़ना चाहते हैं तो हमारी साइट पर जुड़ें और ताज़ा ख़बरें देखें।

फ्रांस में तंग संसद की स्थिति, वामपंथी गठबंधन ने छेड़ा सत्ता संघर्ष
Jonali Das 0

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फ्रांस में संसदीय चुनावों के बाद वामपंथी गठबंधन 'न्यू पॉपुलर फ्रंट' ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का केंद्र-संबंधी गठबंधन दूसरे स्थान पर रहा। न तो किसी को बहुमत मिला और परिणामस्वरूप हिंसक प्रदर्शन हुए। वामपंथी गठबंधन ने मैक्रों की पेंशन सुधार योजनाओं को खत्म करने का वादा किया है। प्रधानमंत्री गेब्रियल अटाल ने इस्तीफा दिया।