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राज्यसभा के मानसून सत्र में जगदीप धनखड़ और जया बच्चन के बीच तीखी नोकझोंक; विपक्ष ने किया वॉकआउट

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राज्यसभा के मानसून सत्र में जगदीप धनखड़ और जया बच्चन के बीच तीखी नोकझोंक; विपक्ष ने किया वॉकआउट
Jonali Das 9 टिप्पणि

राज्यसभा में मानसून सत्र के दौरान क्या हुआ?

राज्यसभा का मानसून सत्र हमेशा से ही राजनीतिक उठा-पठक का समय होता है, लेकिन इस बार के सत्र में परिस्थितियाँ कुछ अलग ही रहीं। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ और समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन के बीच तीखी नोकझोंक ने सत्र का माहौल गर्म कर दिया। इस दौरान विपक्षी दलों ने अपने सांसदों के निलंबन का जोरदार विरोध किया और अंततः वॉकआउट करने का निर्णय लिया।

विवाद की जड़

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब सरकार ने पिछले दिन के सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों के कथित अनुचित आचरण के चलते उनके निलंबन की घोषणा की। इस निर्णय पर विपक्ष ने अपनी कड़ी आपत्ति जताई। जया बच्चन ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह सरकार का तानाशाही रवैया दर्शाता है। उन्होंने धनखड़ के बयानों को भी चुनौती दी और इस तरह का निलंबन अवैध और लोकतंत्र विरोधी बताया।

विरोध का स्वरूप

जब जया बच्चन ने अपना विरोध जताया, तब धनखड़ ने उनसे संयम रखने और नियमों का पालन करने को कहा। इससे विरोध और भी उग्र हो गया। विपक्षी सांसदों ने इस चर्चा के दौरान बार-बार सरकार और सभापति की आलोचना की। उनके अनुसार, सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने का प्रयास कर रही है और संसद के मानदंडों का उल्लंघन कर रही है।

विपक्षी दलों का निलंबन पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप

विपक्षी दलों के नेताओं ने निलंबित सांसदों का पक्ष लेते हुए बताया कि इन सांसदों का निलंबन अन्यायपूर्ण है और सरकार द्वारा अपने विरोधियों के खिलाफ एक योजनाबद्ध कदम है। सांसदों की कथित अनुचित गतिविधियों की जांच के बिना उन्हें निलंबित करना एक गंभीर मुद्दा है। इसके परिणामस्वरूप जब विपक्षी सांसदों ने वॉकआउट किया तो सदन में बहस और हंगामा और भी बढ़ गया।

विपक्ष का हठधरमी

सत्र के दौरान ये गति फिर आगे बड़ी और विपक्ष ने सदन में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्षी दलों के सांसद बार-बार सदन के मध्य में आकर नारेबाजी करते रहे, जिससे कार्यवाही में बार-बार बाधा पड़ी। इससे पहले भी मानसून सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार की नीतियों के खिलाफ कई बार सदन में विरोध प्रदर्शन किए हैं। लेकिन इस बार की स्थिति थोड़ा अधिक गंभीर रही क्योंकि इसने विपक्ष और सरकार के बीच गहरे विभाजन को उजागर किया।

वर्तमान राजनीतिक स्थिति

वर्तमान राजनीतिक स्थिति

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती खाई

यह घटना स्पष्ट तौर पर दर्शाती है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विश्वास की कमी है। विपक्ष का मत है कि सरकार अपने राजनीतिक हितों के चलते लोकतंत्र की मर्यादा का हनन कर रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि वे देश के विकास और सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।

राजनीतिक मतभेद और सभ्य लोकतंत्र के सवाल

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के मतभेद और सत्ता का दुरुपयोग केवल लोकतंत्र को कमजोर करेगा। विपक्ष के निलंबन और विरोध के ऐसे कदम केवल राजनीतिक माहौल को और भी पेचीदा बना देते हैं। राजनीतिक दलों को मिलकर एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बहाली करनी चाहिए ताकि देश आगे बढ़ सके।

अगले कदम क्या हो सकते हैं?

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष आगे क्या कदम उठाते हैं। विपक्ष पूरी तरह से इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहा है और सरकार के खिलाफ आंदोलन करने का मन बना चुका है। वहीं, सरकार को भी अब अपने कदम सावधानी से उठाने होंगे ताकि लोकतंत्र की गरिमा बनी रहे।

Jonali Das
Jonali Das

मैं समाचार की विशेषज्ञ हूँ और दैनिक समाचार भारत पर लेखन करने में मेरी विशेष रुचि है। मुझे नवीनतम घटनाओं पर विस्तार से लिखना और समाज को सूचित रखना पसंद है।

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टिप्पणि (9)
  • Arun Kumar
    Arun Kumar

    अगस्त 11, 2024 AT 05:42 पूर्वाह्न

    ये सब नाटक है भाई... विपक्ष को निलंबित करने के बजाय उन्हें सुनो, फिर बात बनेगी।

  • sugandha chejara
    sugandha chejara

    अगस्त 11, 2024 AT 23:28 अपराह्न

    मैं तो समझती हूँ कि विपक्ष का गुस्सा क्यों है। लेकिन वॉकआउट से कुछ नहीं होगा... बातचीत की जरूरत है। दोनों तरफ से थोड़ी समझदारी चाहिए।

  • DHARAMPREET SINGH
    DHARAMPREET SINGH

    अगस्त 13, 2024 AT 11:34 पूर्वाह्न

    अरे ये सब राजनीतिक गेम है। सरकार को फायदा है अगर विपक्ष बेकार दिखे। और विपक्ष को फायदा है अगर वो शहीद बन जाएं। दोनों का बिजनेस चल रहा है।

  • indra group
    indra group

    अगस्त 14, 2024 AT 04:35 पूर्वाह्न

    जया बच्चन का जो बयान है, वो बिल्कुल गलत है। लोकतंत्र में नियम होते हैं, और जो उन्हें तोड़ता है, उसे सबक सिखाना पड़ता है। ये नाटक नहीं, देश की अखंडता का मुद्दा है।

  • venkatesh nagarajan
    venkatesh nagarajan

    अगस्त 14, 2024 AT 15:35 अपराह्न

    क्या हम भूल गए कि संसद एक संस्था है, न कि एक टीवी शो? जब नियमों को नजरअंदाज किया जाता है, तो विरोध भी नियमों के भीतर होना चाहिए। नहीं तो ये अराजकता है, लोकतंत्र नहीं।

  • Agam Dua
    Agam Dua

    अगस्त 15, 2024 AT 01:38 पूर्वाह्न

    ये जो विपक्ष ने वॉकआउट किया... ये तो बस अपनी असफलता को छुपाने का तरीका है। जब तक तुम बहस नहीं कर पाते, तब तक तुम असली राजनीतिक शक्ति नहीं हो। बस बोलने का नाटक कर रहे हो।

  • Drishti Sikdar
    Drishti Sikdar

    अगस्त 15, 2024 AT 23:05 अपराह्न

    अरे ये सब तो बस एक बड़ा शो है... धनखड़ का चेहरा देखो, जैसे कोई उसे नहीं बुलाया हो। और जया बच्चन का अभिनय... ओह बहुत अच्छा है, बॉलीवुड का बेटा है न?

  • Manu Tapora
    Manu Tapora

    अगस्त 17, 2024 AT 01:05 पूर्वाह्न

    मैंने इस पूरे घटनाक्रम को ट्रांसक्रिप्ट के साथ चेक किया है। जया बच्चन ने वास्तव में कोई नियम तोड़ा नहीं। उनका बयान संविधान के अनुच्छेद 121 के तहत पूरी तरह से वैध था। निलंबन बिना जांच के अवैध है। ये सिर्फ एक राजनीतिक अत्याचार है।

  • gauri pallavi
    gauri pallavi

    अगस्त 17, 2024 AT 01:45 पूर्वाह्न

    अच्छा बस... एक तरफ विपक्ष नारे लगा रहा है, दूसरी तरफ सरकार निलंबन कर रही है। अब बस इंटरनेट पर एक नया मीम बन गया है: 'जब तुम्हारी बात नहीं सुनी जाती, तो तुम वॉकआउट कर देते हो'। और देश आगे बढ़ रहा है... बस इस बात पर भूल गए कि लोकतंत्र के लिए बातचीत जरूरी है।

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