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क्रैश टेस्ट क्या है? आसान समझ और ताज़ा ख़बरें

जब आप कार चलाते हैं या नया गेम डाउनलोड करते हैं, तो पीछे एक बड़ा सवाल रहता है – अगर कुछ गड़बड़ हो जाए तो क्या होगा? यही सवाल हल करने के लिए ‘क्रैश टेस्ट’ किया जाता है। ये टेस्ट चीज़ों को जानबूझकर टक्कर या एरर दे कर देखता है कि वो कितना सुरक्षित रहेगी और नुकसान कम से कम कैसे हो सकता है।

ऑटोमोबाइल क्रैश टेस्ट – जीवन‑सुरक्षा की पहली लाइन

गाड़ियों में क्रैश टेस्ट सबसे ज्यादा देखा जाता है क्योंकि ये सीधे लोगों की जान बचा या ले सकता है। भारत में NCAP (न्यू कार एवलिएशन प्रोटोकॉल) के अनुसार, हर नई मॉडल को फ्रंट, साइड और रियर टकराव के अलग‑अलग सिमुलेशन से गुज़रना पड़ता है। टेस्ट के दौरान डमी या सेंसर लगाकर मापते हैं कि एयरबैग कब खुलता है, सीट बेल्ट कितना खिंचती है और बॉडी स्ट्रक्चर कितनी मजबूत है। अगर गाड़ी इन मानकों में नहीं आती तो उसे बाजार में बेचने की अनुमति नहीं मिलती।

हाल ही में एक बड़ा स्कैंडल था – कुछ बजट कारों ने क्रैश टेस्ट में झूठे डेटा दिखाए थे। यह खबर हर रोज़ हमारे टैग ‘क्रैश टेस्ट’ के तहत आती रहती है क्योंकि लोग जानना चाहते हैं कि कौन सी गाड़ी भरोसेमंद है और किसे खरीदते समय सतर्क रहना चाहिए।

सॉफ़्टवेयर एवं गेमिंग में क्रैश टेस्ट – डिजिटल दुनिया की सुरक्षा

गाड़ियों के अलावा, सॉफ्टवेयर भी अक्सर ‘क्रैश’ होता है। ऐप डेवलपर अपने प्रोग्राम को विभिन्न डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलाकर देखते हैं कि कहीं एरर तो नहीं आ रहा। अगर कोई बग मिलता है तो उसे फिक्स करके अपडेट निकालते हैं, वरना यूज़र का डेटा खतरे में पड़ सकता है।

गेमिंग इंडस्ट्री में भी क्रैश टेस्ट अहम है। नया रिलीज़ होने वाला गेम अक्सर ‘बीटा’ मोड में खिलाड़ियों को दिया जाता है ताकि वे बताएं कि कौन सी लेवल या ग्राफिक्स सेटिंग पर फ्रेम ड्रॉप या फ्रीज़ हो रहा है। इससे डेवलपर जल्दी सुधार कर सकता है और अंतिम वर्शन में स्मूद प्लेयर एक्सपीरियंस दे पाता है।

आजकल हमारे टैग ‘क्रैश टेस्ट’ के नीचे कई लेख आते हैं – जैसे कि एक नए मोबाइल गेम ने लॉन्च के पहले ही कई लोगों की डिवाइस पर क्रैश कर दिया, या फिर किसी बड़े सॉफ्टवेयर कंपनी ने अपडेट में सुरक्षा लीक ठीक नहीं की तो यूज़र को नुकसान हुआ। ये सब खबरें हमें बताती हैं कि डिजिटल प्रोडक्ट भी उतनी ही देखभाल चाहते हैं जितनी कारें।

तो आप कब ‘क्रैश टेस्ट’ देखेंगे? जब आप नई कार खरीदने जाएँ, नया ऐप इंस्टॉल करें या नया गेम ट्राय करें – हमेशा रिव्यू और टेस्‍ट रिपोर्ट पढ़िए। इससे न सिर्फ़ आपके पैसे बचेंगे, बल्कि आपकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

आखिर में यही कहा जा सकता है कि क्रैश टेस्ट सिर्फ़ तकनीकी शब्द नहीं, यह एक चेकपॉइंट है जो हमारे रोज‑मर्रा के फैसलों को सुरक्षित बनाता है। चाहे वह सड़कों पर हो या स्क्रीन पर – समझदारी से चुनें और हमेशा अपडेटेड जानकारी के साथ रहें।

मारुति सुज़ुकी डिजायर ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में हासिल किए 5 स्टार
Jonali Das 0

मारुति सुज़ुकी डिजायर ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में हासिल किए 5 स्टार

मारुति सुज़ुकी डिजायर ने ग्लोबल NCAP क्रैश टेस्ट में 5 स्टार सुरक्षा रेटिंग हासिल की है। यह मारुति का पहला मॉडल है जिसने यह उपलब्धि हासिल की। डिजायर ने वयस्क यात्रियों के लिए 34 में से 31.24 अंक प्राप्त किए हैं, जबकि बच्चा यात्रियों की सुरक्षा के लिए इसे 4 स्टार मिले। यह नई सुरक्षा मानकों के साथ अन्य सुरक्षा सुविधाएं जैसे छह एयरबैग और ईएससी के साथ आती है।